Tuesday, November 20, 2018

कंटेंट के लिए हॉलीवुड कंपनी से डील की

टेक दिग्गज एपल ने हाल ही में हॉलीवुड एंटरटेनमेंट कंपनी ए-24 से करार किया है। यह कंपनी एपल के लिए ओरिजिनल कंटेंट (फिल्में व सीरीज) बनाएगी। एपल इसके जरिए स्ट्रीमिंग दिग्गज नेटफ्लिक्स और अमेजन को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। एपल जल्द ही स्ट्रीमिंग सर्विस लॉन्च करने वाली है। 

दरअसल एपल ने हॉलीवुड की ओर रुख पिछले साल ही कर लिया था। जब कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट एडी क्यू ने सेलेब्रिटी एक्जीक्यूटिव जेमी एर्लिच और सोनी पिक्चसर्स के वेन एम्बर्ग को अपनी टीम में जोड़ा था। 

अगले साल शुरू हो जाएगी सर्विस, इसके लिए 7200 करोड़ का बजट

एपल के इस बिजनेस प्लान से जुड़े सूत्र ने बताया कि कंपनी के लिए खासतौर पर जो कंटेंट तैयार हो रहा है, वह 2019 में एपल डिवाइस पर मिलना शुरू हो जाएगा। ए24 चर्चित कंपनी है और इसने मूनलाइट,एमी, लेडीबर्ड और रूम जैसी कई ऑस्कर विजेता फिल्में रिलीज की हैं। 
एपल ने ओरिजिनल कंटेंट तैयार करवाने के लिए करीब 7,200 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। हालांकि डील के सारी शर्तों को खुलासा नहीं किया गया है। पर यह सुनिश्चित है कि यह डील आने वाले कई वर्षों के लिए साइन की गई है। 

हाल ही में कंपनी ने घोषणा की थी कि ओप्रा विन्फ्रे भी इसके लिए ओरिजिनल प्रोग्राम तैयार करेंगी ताकि दुनियाभर में फैले दर्शकों के साथ जुड़ने में आसानी हो। इसके अलावा एपल ने जेनिफर एनिसन और रीज विदरस्पून के साथ मॉर्निंग शो के दो सीजन के लिए ड्रामा सीरीज तैयार करने की बात भी कही है। इसके अलावा युवा दर्शकों और बच्चों को भी आकर्षित करने के लिए विभिन्न कंटेंट पर काम चल रहा है
साइंस और फिक्शन पसंद करने वालों के लिए स्टीवन स्पीलबर्ग कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत 80 के दशक में चर्चित रहीं काव्य श्रृंखला 'अमेजिंग स्टोरीज' को फिर से बनवाया जा रहा है। 

अमेजन और नेटफ्लिक्स को मिलेगी चुनौती

एपल की इस डील की खबर ऐसे समय सामने आई है जब नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो दुनियाभर के दर्शकों को अपनी ओर लाने के लिए ज्यादा से ज्यादा ओरिजिनल कंटेंट बनवा रहे हैं। इसके अलावा एचबीओ भी अगले साल अपनी स्ट्रीमिंग सर्विस लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।
वहीं डिज्नी ने भी 20सेंचुरी फॉक्स से करीब 71.3 अरब डॉलर के असेट खरीदने के लिए डील फाइनल की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका फायदा दर्शकों को ही मिलेगा। उनके पास कई सारे विकल्प मौजूद रहेंगे। 

भावनाओं को समझने के अलावा हिंदी और भोजपुरी में बात भी कर सकती है

राची के रंजीत श्रीवास्तव की बनाई रोबोट 'रश्मि' टेलीविजन शो 'इंडियाज़ गॉट टैलेंट' के अगले लेवल के लिए सिलेक्ट की गई है। रश्मि दुनिया की पहली ऐसी रोबोट है जो भोजपुरी बोल सकती है। इसके अलावा हिंदी में भी बोलती है और सभी फीलिंग्स को भी समझ सकती है। किसी भी तरह के सवालों के जवाब भी देती है। शो में रश्मि ने सभी को अपने तरीके से हैलो किया। जब करण जौहर ने पूछा कि किस एक्टर के साथ आप मूवी करना चाहेंगी तो जवाब था रजनीकांत।

रोबोट फिल्म देखकर आया आइडिया

रश्मि को बनाने वाले रंजीत ने कुछ दिलचस्प बातें शेयर कीं। उन्होंने बताया कि 2 साल पहले जब रोबोट फिल्म आई थी तब उनके बेटे ने कहा की पापा ये बन सकता है क्या। मेरा जवाब था नहीं ये सब नहीं बन सकता। फिर मैंने ही सोचा कोशिश करने में क्या है।
उन्होंने बताया कि इसमें जितनी भी टेक्नोलॉजी यूज़ किए गए हैं सब खुद से किया हुआ है। इसे बनाने में पूरे 2 साल लगे। रात के समय का इस्तेमाल कर पूरे कॉन्सेंट्रेशन के साथ इसे बनाया। लोगों को नमस्ते, हेलो और बाय करने के अलावा रश्मि में हर तरह की भावना है। 
नॉन टेक्निकल बैकग्राउंड से हैं रंजीत : रंजीत की स्कूली शिक्षा रामगढ़ गुरुनानक स्कूल से हुई है। आगे उन्होंने मार्केटिंग में एमबीए किया और एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया है। रंजीत बिल्कुल नॉन टेक्निकल बैकग्राउंड से हैं। उन्हें 1 साल का समय लग गया समझने में कि कैसे-कैसे पार्ट्स की जरूरत होगी। सब कुछ इक्कठा करते हुए इन्हें और 1 साल का समय लग गया। रश्मि 2 साल 5 महीने की हो गई है। 

फ्रांस के ऐतिहासिक ड्रामा गार्डियन ऑफ द टेंपल को ला मशीनिया कंपनी ने आम जनता के बीच प्रदर्शित किया। खास बात यह है कि कंपनी ने अपने खर्च पर रोबोट तैयार किए। 50 फीट का एक विशाल रोबोट बनाने में कंपनी को 15 मिलियन यूरो (करीब 124 करोड़ रुपए) की लागत आई। जबकि कलाप्रेमी टूलो शहर को शो प्रदर्शित कराने के लिए कुल 4.4 मिलियन यूरो (करीब 36 करोड़ रुपए) खर्च करने पड़े। इसके अलावा शो में एक 45 फीट की रोबोट मकड़ी को भी पात्र बनाया गया। हालांकि, कंपनी पहले भी उसे दूसरी जगहों पर इस्तेमाल कर चुकी थी।

शहर के म्यूजियम में ही रखे जाएंगे रोबोट
पौराणिक शो के खत्म होने के बाद कंपनी टूलो में ही एक खास म्यूजियम बनाने की तैयारी में है। इसमें पात्र निभाने वाले रोबोटों को रखा जाएगा। जिस जगह इन्हें रखा जाएगा, उसे हॉल ऑफ मशीन नाम दिया गया है। शहर के अधिकारियों का कहना है कि इस आयोजन ने दुनियाभर को अपनी तरफ आकर्षित किया है। ऐसे में जल्द ही पर्यटक इस तरह के शो देखने टूलो पहुंचेंगे। म्यूजियम के जरिए शहर आसानी से अपनी कमाई बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बाकी कुछ देश भी इस तरह के आयोजन के लिए रोबोट कंपनी से संपर्क करेंगे।

Thursday, November 8, 2018

मध्यकालीन शासकों से ज़्यादा असहिष्णु हैं वर्तमान नेता

क्योंकि तीन हफ़्ते पहले जब इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया था तब से इस बात की उम्मीद लगाई जा रही थी.

आख़िरकार भगवा चोला पहनने वाले मुख्यमंत्री के लिए शहरों और इलाकों के नाम बदलना प्राथमिकता का विषय है.

उनकी पूरी राजनीति ही प्रतीकवाद और धार्मिक ध्रुवीकरण पर आधारित है.

मुख्यमंत्री बनने से पहले ही योगी आदित्यनाथ ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र गोरखपुर में कई जगहों के नामों में परिवर्तन किए थे.

11वीं शताब्दी के संत बाबा गोरखनाथ के नाम पर बसे शहर और उनके नाम पर चल रहे मठ का नेतृत्व कर रहे योगी आदित्यनाथ जब यहां के सांसद हुआ करते थे तब उन्होंने गोरखपुर के मियां बाज़ार को माया बाज़ार और हुमायूंपुर को हनुमानपुर बना दिया था.

नाम बदलने के फ़ायदा

ये एक बड़ा सवाल है कि नाम बदलने से इन इलाकों पर क्या असर पड़ा है.

लेकिन इतिहास बताता है कि मध्यकालीन शासकों की धार्मिक असहिष्णुता के लिए उनकी कितनी भी निंदा की जाए लेकिन वे 21वीं शताब्दी के शासकों जितने असहिष्णु नहीं थे.

शोधार्थी कहते हैं प्रयाग और अयोध्या काफ़ी प्राचीन शहर हैं लेकिन किसी भी शासक ने उनका नाम बदलने की कोशिश नहीं की.

सोलहवीं शताब्दी के मुगल बादशाह अकबर ने गंगा किनारे इलाबास (अल्लाह का वास) शहर को बसाया जिसका नाम ब्रिटिश राज के दौरान इलाहाबाद में बदल गया.

लेकिन अकबर ने कभी भी गंगा, यमुना और पौराणिक नदी सरस्वती के संगम किनारे बसे कस्बे प्रयाग का नाम बदलने की कोशिश नहीं की.

इसी तरह अवध के पहले नवाब सादत अली खान ने घाघरा नदी के किनारे 1730 में फ़ैजाबाद शहर को बसाया.

लेकिन कभी भी भगवान राम का जन्म स्थान माने जाने वाले अयोध्या को एक नया नाम नहीं दिया.

ये प्राचीन कस्बा आख़िरकार ब्रिटिश राज में फ़ैज़ाबाद ज़िले का हिस्सा हो गया.ॉ

अयोध्या के लोग भव्य दीपोत्सव के लिए उत्साहित क्यों नहीं हैं?
हत्या का 19 साल पुराना मामला जिससे परेशान हैं योगी
हनुमानगढ़ी का ध्यान रखते थे नवाब
अयोध्या को हिंदू धर्म के तीर्थ स्थान के रूप में ख्याति मिली और इसकी आर्थिक गतिविधियां धार्मिक पर्यटन पर केंद्रित रही.

ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि अयोध्या के सबसे पुराने मंदिर हनुमान गढ़ी के रखरखाव के लिए खर्चा भी नवाब सादत अली ख़ान के ख़ज़ाने से आता था.

यही नहीं, जब सादत अली ख़ान के पोते आसफ़ उद दौला ने 1775 में सिंहासन पर बैठने के बाद अवध की राजधानी को फ़ैज़ाबाद से उठाकर लखनऊ में बना लिया तब भी ये परंपरा जारी रही.

ख़ास बात ये है कि जिस तरह इलाहाबाद का अर्थ ख़ुदा का घर है, उसी तरह फ़ैज़ाबाद का अर्थ 'सभी के कल्याण वाली जगह' है.

इसके विपरीत सीएम योगी ने स्पष्ट रूप से इलाहाबाद और फैजाबाद का नाम बदलते समय किसी की भावनाओं को ध्यान में नहीं रखा.

कुछ लोगों को ये भी संदेह है कि ये फ़ैसला सिर्फ़ समाज के एक वर्ग की भावनाओं को आहत करने के लिए लिया गया है.

जूलियट के घर गए होते योगी आदित्यनाथ तो.....
फ़ैज़ाबाद बना अयोध्या तो क्या बोले लोग...
'सबका साथ सबका विकास'कैसे?

ये बात सत्तारूढ़ पार्टी की सबका-साथ-सबका-विकास वाले नारे के प्रति समर्पण पर भी सवाल पैदा करती है.

अगर ये मान भी लिया जाए कि इन दोनों के नाम बदलने से इन जगहों को सामाजिक और आर्थिक स्तर पर फायदा पहुंचेगा तो सरकार को आसपास के ज़िलों से ज़मीन लेकर प्रयाग और अयोध्या को नए ज़िले बनाने से किस चीज़ ने रोक दिया.

Thursday, November 1, 2018

斯里兰卡现“两个总理”危机 中印“龙象之争”忧虑再起

斯里兰卡近日陷入政治危机,两名不同政治派别的领导人都自称是“合法总理”。这加深了外界对于这个印度洋岛国未来外交政策的担忧。

事件源于上周五(10月26日),斯里兰卡总统西里塞纳(Maithripala Sirisena)突然宣布罢免总理维克勒马辛哈(Ranil Wickremesinghe)职务,并解散内阁。他随后邀请前任总统拉贾帕克萨(Mahinda Rajapaksa)接任总理一职。

多名内阁部长声称总统的做法“违宪”,维克勒马辛哈也拒绝搬离总理府,他表示自己仍是合法总理。

曾实行铁腕统治的前总统拉贾帕克萨被外界视为“亲中派”。而总理维克勒马辛哈上任后则试图重新平衡斯里兰卡与印度的关系。分析人士认为,尽管导致目前危机的因素更多的是斯里兰卡国内因素,但新总理的任命无疑将加剧中印在该国的影响力博弈。

联姻破裂”
2015年,当斯里兰卡迎来大选时,已统治该国10年的总统拉贾帕克萨败给了和自己同属一个政党的西里塞纳。而后者的获胜则源于他与反对党领导人维克勒马辛哈组成政治联盟。

人们或许没有想到,这段标志着斯里兰卡两个斗争近70年的主要政党间相互和解、联合执政的“政治联姻”,在短短三年内便迅速破裂。

总统西里塞纳周六在电视讲话中称,他与总理维克勒马辛哈的政策三年来一直存在很大差异,其中包括一起饱受争议的中央银行国债发行案,维克勒马辛哈被指导致了6500万美元的损失。他另称,维克勒马辛哈领导的内阁还卷入了一起刺杀他的阴谋。

西里塞纳宣布罢免维克勒马辛哈的同时,他还宣布自己领导的统一人民自由联盟(UPFA)退出与维克勒马辛哈领导的统一国民党(UNP)组成的联合政府,并暂停议会直至11月16日。

《纽约时报》报道称,在拉贾帕克萨就职新任总理后,有多名内阁部长和议员开始投靠新政府。